Thursday, February 25, 2021

Vimoh by Dr. Deepti Priya.

संक्षिप्त परिचय – कवयित्री डॉ. दीप्ति प्रिया

डॉ. दीप्ति प्रिया, दरभंगा (बिहार) की मूल निवासी, अपनी पढाई रांची (झारखण्ड) और बेंगलुरु (कर्नाटक) में पूरी करके पिछले डेढ़ दशक से मनोविज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत हैं। विचार साहित्य की आधुनिक कवयित्री व लेखिका दीप्ति जी की, गत वर्षों में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। उनकी हाल में प्रकाशित हिंदी कविता की पुस्तक “विमोह” मानव मन को उद्वेलित करने में सक्षम है।

पुस्तक “विमोह” के संबंध में मेरे विचार

“विमोह” यह पुस्तक लेखिका डॉक्टर दीप्ति प्रिया के द्वारा लिखा गई है। लेखिका ने बहुत ही सुंदर पुस्तक की रचना की है। ‘विमोह’ में आठ हिंदी कविता है, इन कविताओं में महाकाव्य महाभारत और श्रीमद्भगवद् गीता के रूपकों पर लिखा गया है। पुस्तक विमोह की कविताएं काव्य-कथा के शैली में लिखी हुई है और महाभारत के विषय से यह रोचक भी है, साथ में यह पुस्तक स्व के स्वरूप पर कुछ गहरे अर्थों को भी प्रस्तुत करने में सफल रही है।

पुस्तक की सभी कविताएं मन को छू जाने वाली रचना है। जैसे की "वायु पुत्र लौट आएगा" इस कविता में प्यार है, ममता है जो आपके मन को छू जाएगी और आपके मन की भावना को जागृत कर देगी और आपको किताब से जोड़े रखेगी, साथ में बहुत सुन्दरता से यह विचार भी रखती है कि सभी उपहारों को स्वीकार करना उचित नहीं है, कई बार यह आपके लिए समस्या भी खड़ा कर सकता है। "कुछ बोल" ये कविता मेरे दिल के करीब है, इसमें अन्याय से लड़ने और उसके लिए अपने आप को खड़ा करने के लिए प्रेरणा है। पुस्तक “विमोह” को पढ़ कर बेहतर महसूस तो होता ही है साथ में हिंदी भाषा की गहराई भी दिखती है और जाने-अनजाने में भावनाओं और विचारों सैलाब भी उमड़ने लगता है। संपूर्ण पुस्तक बहुत ही सरलता से लिखी हुई है, भाषा भी शुद्ध हिंदी में है और कविताओं का कहानी के रूप में होने के कारण यह पढ़ने में भी बहुत दिलचस्प है। कुछ कविताएँ 30 से अधिक पृष्ठों में लिखी गई है और पढ़ने से कविता और कहानी दोनों का ही अनुभव होता है, यह बहुत ही सराहनीय है। समग्र पुस्तक विचारशीलता के साथ लिखी हुई है, पढ़ कर सकारात्मक ऊर्जा का एहसास तो होता ही है साथ-साथ कवियित्री की प्रतिभा भी दिखती है।

“विमोह” की हर पंक्ति आकर्षित करते हुए बहुत कुछ कहती हैं, पढ़कर ऐसा लगता है कि बार-बार पढ़ें और अलग-अलग स्तरों पर समझें। “विमोह” को पढ़कर मेरे अंदर एक नयी उमंग जाग उठी।

My Take: 

Book “Vimoh” is thoughtful, beautiful, and overwhelming

“Vimoh” is one of those books that has a beautiful collection of poems that will amaze you and make you feel magical. Wonderfully written with deep meaning and full of emotions. Author Deepti Priya has written this book expressively and with passion, the depth of thoughtfulness in the book is just inspiring.

I love reading poems and I loved reading this book. The pure Hindi language is what makes this book interesting and amazing. It’s a book that can be enjoyed by any age group. Poetries in the book are more like a story or narration where the voice of a narrator and characters both appears together and make it enjoyable to read. I am overwhelmed with the content, the style, and the overall presentation.

Overall if you want to feel lost by reading and love Hindi poems then this is a perfect book for you. So, click here and read now “Vimoh” written by author and Dr. Deepti Priya.

Tuesday, January 26, 2021

Devalika by Laxmikant Shukla

The Blurb:


“छोड़ जाते हो तुम जब भी मुझे... मेरे हृदय को चुभता है। ‘देवालिका’ पूर्व में उत्तर भारत के मध्य स्थित शेषालय राज्य की राजकुमारी दिवा की प्रेम कहानी है। जिसे काशी के राजकुमार धनंजय से प्रेम हुआ। परन्तु मगध के शक्तिशाली राजा दुर्जय सिंह को उनका प्रेम रास न आया। कहा जाता है कि दुर्जय के पास सौ अश्वों का शारीरिक बल था। जिसे किसी भी युद्ध में पराजित करना लगभग असम्भव था। दुर्जय ने भरे स्वयंवर से दिवा का हरण कर लिया और बलपूर्वक मगध ले आया। दिवा और धनंजय का प्रेम यहीं समाप्त नहीं हुआ बल्कि वास्तविक कहानी यहीं से प्रारम्भ हुई। दिवा के हरण के पश्चात् काशी और मगध के बीच महा प्रलयंकारी युद्ध हुआ, जो लगातार नौ दिन तक चल। जिसमें भारत के प्रमुख राज्यों ने हिस्सा लिया। ये कथा धनुर्धारी अमृत्य और यदुवंशज माधव की कहानी भी कहती है। देवालिका में युद्ध के प्रत्येक दिन का सजीव वर्णन और प्रयोग किये गये अस्त्रों-शस्त्रों की जानकारी बखूबी दी गई है। कथा के प्रमुख बिंदु अमृत्य का धनुर्कौशल, दुर्जय की दुर्जयता, दिवा की सुन्दरता और माधव की कूटनीति हैं। ये कथा हमें राजवंश की ओर ले जाती है। कथा के कुछ हिस्से भगवान परशुराम और अश्वस्थामा से जुड़े हैं तथा प्रथम अध्याय उन्हीं से शुरू हुआ ।

About Book:

देवलिखा के लेखक लक्ष्मीकांत शुक्ला की नई किताब है और यह महाभारत युग के एक महाकाव्य प्रेम त्रिकोण के बारे में है। 

इस किताब की हर एक चीज़ राज्य से लेकर उनके लोग तक, अद्वितीय वर्ण से लेकर कहानी तक, महाभारत युग से लेकर अभी के समय, का बहुत ही सुन्दर और आकर्षित तरीके से यह किताब लेखक ने लिखा है। 

यह पुस्तक की भाषा पढ़ने में बहुत सरल है और मुझे यह बहुत ही आकर्षक किताब लगी, क्योंकि एक बार जब मेने पढ़ना शुरू किया तो मैं तब तक नहीं रुक सकी जब तक मेने पढ़ना समाप्त नहीं कर लिया। 

हर एक किरदार नए और अनोखे तरीके से लिखा गया है, जो हमे महाभारत युग की याद दिलाता है, राजकुमार से लेकर राजकुमारी तक, प्रेमकथा से लेकर साजिश तक, सयंवर से लेकर चौंकाने वाला मोड़, तो इस कहानी में आगे क्या होगा? जहा एक तरफ बलऔर एक तरफ प्रेम है जो की युद्ध से ही हासिल होगा। 

My Take: 

A unique and exciting love triangle love story straight from Mahabharat times that I genuinely enjoyed reading. All the aspects of the book from, surroundings, to characters' descriptions, from wars to storyline, everything was perfectly written in a detailed manner making it easy to feel lost in the book. 

The story is written in easy to read the Hindi language, all the surprise parts were balanced amazingly making it equally interesting and impressive. 

The highlight of this book is the unique storyline that will not only make you wanna keep reading but will also transfer you into Mahabharat's time. 

Overall, it's an impressive and interesting book, that I will definitely recommend others to read as well. So click here and read now a battle between love and war, in the book Devalika written by author Laxmikant Shukla.

Vimoh by Dr. Deepti Priya.